तेल अवीव। इस्राइल की जेल में बंद वेस्ट बैंक के एक 17 वर्षीय किशोर की सदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई है। यह किशोर बीते छह महीने से बिना किसी आरोप के जेल में बंद था। हिरासत में रहने के दौरान ही अचानक उसकी तबीयत बिगड़ी और वह बेहोश हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई। यह इस्राइल की कैद में मरने वाला पहला किशोर फलस्तीनी नागरिक है। वहीं इस्राइल की हिरासत में मरने वाला यह 63वां फलस्तीनी कैदी बन गया है।
मृतक किशोर की पहचान वालिद अहमद के रूप में हुई है, जो हाईस्कूल का छात्र था। वालिद अहमद के परिजनों का आरोप है कि उसे बीते साल सितंबर में कथित तौर पर इस्राइली सैनिकों पर पथराव के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। मानवाधिकार संगठनों का आरोप है कि इस्राइल की जेलों में 7 अक्तूबर 2023 के हमले के बाद से हजारों फलस्तीनी कैद हैं और वहां उनका उत्पीड़न किया जाता है। हालांकि इस्राइली सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज कर चुकी है। वहीं वालिद अहमद के मामले में इस्राइल की सरकार ने उसकी मौत की वजह का अभी तक खुलासा नहीं किया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, फलस्तीनी कैदी की मौत इस्राइल की मेगिड्डो जेल में हुई है। इस जेल में पूर्व में भी फलस्तीनी कैदियों के उत्पीड़न के आरोप लगे हैं। इस्राइल की सरकार ने कहा है कि वे हिरासत में मरने वाले सभी कैदियों की मौत की जांच कर रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, वालिद जेल में बेहोश होकर गिरा और इससे उसके सिर में गंभीर चोट लगी। इसके बाद उसकी मौत हो गई। चोट को ही उसकी मौत की वजह माना जा रहा है। वालिद के परिजनों का आरोप है कि जेल में मिलने वाले खराब खाने से उसे डायरिया की शिकायत हुई। माना जा रहा है कि इस बीमारी से आई कमजोरी से ही उसकी जान गई।
इस्राइल और हमास के बीच युद्ध शुरू होने के बाद यह इस्राइली कैद में फलस्तीनी कैदी की मौत की 63वीं घटना है। फलस्तीनी संगठनों का दावा है कि इस्राइल की कैद में मध्य पूर्व युद्ध शुरू होने के बाद 300 फलस्तीनी कैदियों की मौत हुई है। फलस्तीन का ये भी कहना है कि इस्राइल के पास 72 फलस्तीनी कैदियों के शव है, इनमें से 61 ने गाजा युद्ध शुरू होने के बाद जान गंवाई हैं।
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