इन्दौर। अभी नगर निगम घर-घर से गीला और सूखा कचरा अलग-अलग लेता है। वहीं दो वार्डों में ब्लैक यानी काली डस्टबिन भी घरों में रखवाई गई और उसमें मेडिकल, कांच, बोतल, कैन, मास्क या इस तरह का दूषित कचरा अलग से लिया जा रहा है। अभी दो वार्ड 79 और 49 में यह प्रयोग किया जा रहा है और दो दिन में ही निगम को इस तरह का 50 किलो कचरा मिल भी गया। इसके बाद
सभी वार्डों में इसे लागू किया जाएगा।
नगर निगम इस तरह के प्रयोग से ही स्वच्छता के मामले में लगातार चौथी बार देश में नम्बर वन आया है। पिछले दिनों 150 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले गैस प्लांट का शिलान्यास भी मुख्यमंत्री के हाथों करवाया, जो कि दुनिया का दूसरा प्लांट रहेगा और इसमें गीले कचरे से सीएनजी बनेगी। वहीं नगर निगम ने शहर के प्रमुख चौराहों, सडक़ों पर छोटी डस्टबिन लगवा रखी है, ताकि लोग सिगरेट के पैकेट, पाऊच या अन्य छोटा-मोटा कचरा उसमें डाल सकें। पिछले दिनों नीली और हरी डस्टबिनों के साथ पीली डस्टबिन भी और अलग से लगवाई गई, जिसमें कोरोना और मेडिकल से संबंधित कचरा डाला जा सके। अब घरों में भी लोगों को प्रेरित किया जा रहा है कि वह गीले-सूखे कचरे के अलावा अन्य हानिकारक कचरा, जो कि दवाइयों, आज-कल इस्तेमाल हो रहे मास्क, सेनिटाइजर बोतल, कैन, कांच की बोतल व अन्य तरह का भारी कचरा भी काली डस्टबिन में डालकर दें, ताकि नगर निगम को इसे भी अलग ना करना पड़े और इनका वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोजेबल किया जा सके। अभी नगर निगम ने दो वार्डों में यह काली डस्टबिन घरों में रखवाना शुरू की, जिसके परिणाम भी अच्छे रहे और दो दिनों में ही लगभग 50 किलो का इस तरह का हानिकारक कचरा नगर निगम को प्राप्त हो गया। अब धीरे-धीरे सभी 85 वार्डों में इसे अपनाया जाएगा। निगम ने अपने वाहनों में भी ये कचरा अलग से लेने की व्यवस्था की है।
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