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जयपुर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर दिखा धार्मिक आस्था और परंपरा का अनुपम संगम

  • March 30, 2025


    जयपुर । जयपुर में चैत्र शुक्ल प्रतिपदा पर (On Chaitra Shukla Pratipada in Jaipur) धार्मिक आस्था और परंपरा का अनुपम संगम दिखा (Unique confluence of Religious Faith and Tradition was seen) । भारतीय नववर्ष, नवरात्रि और चेटीचंड के शुभ आगमन पर मंदिरों में पूजन-अर्चन और विशेष अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। श्रद्धालुओं की आस्था और परंपराओं के रंग से संपूर्ण नगर भक्तिमय हो उठा है।

    मोती डूंगरी गणेश मंदिर में नववर्ष और चैत्र नवरात्रि के अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना हुई। भगवान गणेशजी को पंचामृत से अभिषिक्त कर नवीन पोशाक और स्वर्ण मुकुट धारण कराया गया। परंपरा के अनुसार, इस दिन मंदिर में छप्पन भोग की झांकी सजाई जाती है और भक्तों के लिए विशेष दर्शन की व्यवस्था की जाती है। मंदिर महंत कैलाश शर्मा के अनुसार, संध्या समय भव्य आतिशबाजी के साथ नववर्ष का स्वागत किया जाएगा।

    खोले के हनुमानजी मंदिर में पवित्र कलश यात्रा के साथ चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हुई। परंपरागत रीति से कलश स्थापना संपन्न हुई और वाल्मीकि रामायण के पाठ प्रारंभ किए गए। इस अवसर पर 201 आसनों से नौ दिवसीय रामचरित मानस पाठ की शुरुआत हुई। इसके साथ ही, पहाड़ी पर स्थित वैष्णो माता मंदिर में घटस्थापना और दुर्गा सप्तमी के पाठ का आयोजन किया गया। संपूर्ण मंदिर परिसर को भव्य पुष्प एवं दीप सज्जा से अलंकृत किया गया है।

    राजापार्क स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में नवरात्रि की परंपराओं के अनुसार घटस्थापना संपन्न हुई। भक्तों की श्रद्धा और भक्ति के अनुरूप माता रानी का श्रृंगार प्रतिदिन सात बार किया जाएगा। इस अवसर पर हलवा, चना और पूरी का भोग अर्पित किया जाएगा, जिसे श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया जाएगा।

    सिंधी समाज के आराध्य भगवान श्री झूलेलाल के जन्मोत्सव, चेटीचंड महापर्व पर भव्य आयोजन किए गए। मंदिरों में पंचामृत अभिषेक, धार्मिक ध्वजा स्थापन और पारंपरिक छेज नृत्य के साथ भगवान का पूजन संपन्न हुआ। शोभायात्रा में श्रद्धालुओं ने श्रद्धा और उल्लास के साथ भाग लिया। महिलाओं ने पारंपरिक रूप से मीठे चावल और छोले का भोग अर्पित कर संपूर्ण विश्व के कल्याण की प्रार्थना की।

    जयपुर में चैत्र नवरात्रि और नवसंवत्सर के शुभ अवसर पर परंपराओं की अनुपम छटा बिखरी हुई है। धर्म और आस्था का यह पर्व केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति की गहराई को दर्शाता है। नवरात्रि की यह पावन बेला भक्तों के लिए श्रद्धा, भक्ति और आत्मशुद्धि का अवसर प्रदान करती है, जो हमें सनातन परंपराओं से जोड़ती है।

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