उज्जैन: मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के उज्जैन (Ujjain) की क्षिप्रा नदी ( Kshipra River) को स्वच्छ बनाने के लिए क्लोज डक्ट योजना (Closed Duct Scheme) पर काम शुरू किया जा चुका है. उज्जैन की क्षिप्रा को इंदौर (Indore) की कान्ह नदी (Kanh River) से आना वाला गंदा पानी प्रदूषित करता है. इसी से बचने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने क्लोज डक्ट योजना की शुरुआत की है और इस योजना पर करीब 919 रुपये खर्च कर रही है. सिंहस्थ कुंभ पर्व से पहले क्षिप्रा को साफ करने के लिए इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम किया जा रहा है.
कान्ह डायवर्सन योजना 30 किलोमीटर लंबी है, जिसमें 18 किलोमीटर लंबी नहर भी बनाई जा रही है. इसके साथ ही 12 किलोमीटर लंबी एक टनल भी इसमें होगी. 6 महीने में इस प्रोजेक्ट पर लगभग 15 प्रतिशत काम हो चुका है. कान्ह डायवर्सन क्लोज डक्ट योजना पर टेक्निकल और एक्सपर्ट्स की टीम लगातार काम कर रही है. इस प्रोजेक्ट को साल 2027 तक पूरा करने का मकसद है.
जब ये प्रोजेक्ट पूरा हो जाएगा, तो क्षिप्रा नदी को इंदौर की कान्ह नदी से आने वाले गंदे पानी से आजादी मिलेगी. ये योजना इस तरह की भारत की पहली योजना होगी. साल 2028 में सिंहस्थ पर्व है. पिछली बार उज्जैन में कुंभ साल 2016 में लगा था. ऐसे में अब अगला कुंभ साल 2028 में लगेगा. इस दौरान क्षिप्रा नदी में स्नान होंगे. इसके लिए सिंहस्थ से एक साल पहले क्षिप्रा के पानी को साफ कर दिया जाएगा, जिसकी कवायद भी शुरू हो गई है.
अब तक पर्व स्नानों के मौकों पर हर बार करोड़ों रुपये खर्च होते हैं. क्योंकि क्षिप्रा से गंदा पानी बहाकर इसमें नर्मदा का पानी छोड़ा जाता है. इसी में करोड़ों रुपये का खर्च आता है. इसी परेशानी से निजात के लिए इस योजना पर काम शुरू किया गया है. इसके काम में 400 लोगों की टीम लगी है, जो दो शिफ्ट में काम करती हैं. मेसर्स वेंसर कंस्ट्रक्शन कंपनी और रिवर वोल्ट हाइड्रो LPG के वेंचर्स प्रोजेक्ट को पूरा करने में जुटी है.
इस योजना के चलते 12 किलोमीटर के दायरे में 100-100 मीटर की 4 गहरी टनल बनाई जा रही हैं. इन टनल के ऊपर खेती भी की जा सकेगी. इंदौर के जमालपुर गांव से कान्ह नदी के डायवर्सन के लिए नहर योजना पर काम शुरू किया गया है. ये योजना 12 गांव से होकर गुजरेगी और गंभीर नदी पर पूरी होगी. कान्ह नदी का गंदा पानी गंभीर नदी के डाउन स्ट्रीम में छोड़ा जाएगा. क्षिप्रा नदी बहती रहे इसके लिए सेवरखेडी गांव में बैराज बनाकर पानी को लिफ्ट कर सिलारखेड़ी बांध में डाला जाएगा.
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