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    सड़कों के निर्माण के लिए सही एजेंसी का चयन हो

  • February 21, 2023

    • निकायों को सड़कों की मरम्मत के लिए 350 करोड़ की पहली किस्त जारी कर बोले सीएम
    • डामर चुपड़ दिया, बाद में वो उखड़ गया, ऐसा न हो, क्वालिटी कंट्रोल बहुत जरूरी है

    भोपाल। मध्यप्रदेश के शहरों और कस्बों में सड़कों के मेंटेनेंस के लिए अब आर्थिक संकट बाधा नहीं बनेगा। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा, प्रदेश के 413 निकायों को सड़कों की मरम्मत के लिए 750 करोड़ रुपए दिए जाएंगे। पहली किश्त के तौर पर मुख्यमंत्री ने 350 करोड़ रुपए सिंगल क्लिक के जरिए ट्रांसफर भी कर दी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर कहा, हमारे हाईवे तो सारे चकाचक हो गए, लेकिन शहर के अंदर की सड़कें, वार्डों की सड़कें ठीक नहीं हैं। कई जगह ये शिकायत मिलती थी कि मरम्मत नहीं हो रही है। सड़कों की मरम्मत की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों की होती है। बाकी सड़कें शानदार और वार्ड में उड़ रही धूल, तो सुबह-सुबह लोग पार्षद को ही पकड़ेंगे। पहली बार राज्य के बजट से सड़कों की मरम्मत के लिए पैसा दिया है। 750 करोड़ में से 350 करोड आज खातों में डाले हैं।
    मुख्यमंत्री ने सभी निकायों के अधिकारियों से कहा, 15 से 20 दिन में टेंडर की प्रोसेस पूरी हो जानी चाहिए। मई में काम खत्म करना है। इसके बाद बारिश आ जाएगी। मंत्री और अधिकारी इसका ध्यान रखें। कोई इस चक्कर में न पड़े कि ये ठेकेदार आ जाए, पहचान का आए, तो बहुत अच्छा। इस सब में न पड़ें। सही एजेंसी का चयन हो जाए। क्वालिटी कंट्रोल बहुत जरूरी है। डामर चुपड़ दिया, बाद में वो उखड़ गया, ऐसा न हो। मुख्यमंत्री ने कहा, पेयजल, सीवेज की लाइन डालने के बाद सड़क खोद दी जाती है। इसके लिए जरूरी है कि सड़कें रीस्टोरेशन का काम भी किया जाए। जेसीबी से सड़क खोदकर लोग निकल जाते हैं। सड़क कटर से कटनी चाहिए और उसका रीस्टोरेशन होना चाहिए।


    बिल्डिंग परमिशन के साथ जोड़ें घरेलू सोलर पैनल
    मुख्यमंत्री ने कहा, बड़े शहरों में बिल्डिंग परमिशन से पहले घरेलू सोलर पैनल लगवाएं। इसके लिए सरकार सब्सिडी भी देगी। कोई शहर इसकी शुरुआत करे। निकाय को स्वयं की आय के स्त्रोत विकसित करने चाहिए। निकायों के जनप्रतिनिधि डरते हैं कि टैक्स वसूल मत करो, लोग नाराज हो जाएंगे। मामा से ही मांग लो। जब तक आय के साधन न खड़े होंगे, तब तक निकाय प्रगति नहीं कर सकते। अगर 24 घंटे पीने का पानी आने लगा, तो पैसा देना चाहिए। लोग शाम को आइसक्रीम खा लेते हैं। होटल में खाने चले जाते हैं। अगर हम अपने स्थानीय निकाय को ठीक से खड़ा नहीं करेंगे तो विकास नहीं कर पाएंगे। जो सुविधा दे रहे हैं, उसका वाजिब पैसा भी मिलता रहे।

    इंदौर जैसे ग्रीन बॉन्ड भोपाल में भी भरेंगे
    मुख्यमंत्री ने कहा- इंदौर ने अभी ग्रीन बॉन्ड जारी किया। इंदौर ने तय किया कि नर्मदा जी का पानी मोटर से खींचते हैं। ऐसे में उन्होंने बिजली के बिल को कम करने के लिए नगर निगम का सोलर पावर प्लांट लगाने का फैसला किया। प्लांट लगाने के लिए ग्रीन बॉन्ड जारी किया। इंदौर को 244 करोड़ रुपए प्लांट के लिए चाहिए थे। लोगों ने 725 करोड़ के बॉन्ड भर दिए। कल भोपाल में बॉन्ड भरने का काम करेंगे। यहीं कार्यक्रम करेंगे। इस पैसे से जब इंदौर प्लांट लगाएगा तो बिजली बिल का पैसा बचेगा। इस बिजली से इंदौर जगमग होगा। 3 मई को इंटरनेशनल सोलर डे है। हमारा सांची शहर देश का पहला सोलर शहर हो जाएगा। थर्मल पावर प्लांट की बिजली नहीं चलेगी।

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