
दस्तावेज में तो 218 करोड़ में बेचा, लेकिन एक पैसा भी नहीं मिला
इंदौर. हुकमचंद मिल (Hukam Chand Mill) की जमीन (land) की रजिस्ट्री (registration) के मामले में नगर निगम (corporation) खाली हाथ (empty handed) रहा है। दस्तावेज में तो नगर निगम द्वारा इस जमीन को मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना मंडल को 218 करोड़ रुपए में बेचा गया है, लेकिन निगम को एक पैसा भी नहीं मिला है।
पिछले दिनों नगर निगम द्वारा हुकमचंद मिल की 17.9 हेक्टेयर जमीन में से 17.5 हेक्टेयर जमीन की रजिस्ट्री गृह निर्माण मंडल के नाम पर कराई गई। यह रजिस्ट्री 22.45 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर की दर से कराई गई। जिस दस्तावेज का पंजीयन किया गया है उसके अनुसार नगर निगम द्वारा यह जमीन गृह निर्माण मंडल को 218 करोड़ रुपए में बेची गई है। इस दस्तावेज के पंजीयन के बावजूद नगर निगम को इस दस्तावेज के कारण 1 रुपए की भी कमाई नहीं हुई है। इस बारे में जब निगम की ओर से यह रजिस्ट्री करने वाली अपर आयुक्त लता अग्रवाल से पूछा गया तो उनका कहना है कि नगर निगम और गृह निर्माण मंडल के बीच में पूर्व में ही करार हो गया था कि हुकमचंद मिल के श्रमिकों की बकाया राशि करीब 400 करोड़ रुपए का भुगतान गृह निर्माण मंडल द्वारा किया जाएगा। नगर निगम के साथ मिलकर उसके द्वारा पार्टनरशिप में इस मिल की जमीन पर प्रोजेक्ट को आकार दिया जाएगा। इस प्रोजेक्ट से गृह निर्माण मंडल को जो कमाई होगी उसमें नगर निगम और उक्त मंडल का हिस्सा आधा-आधा होगा। इस एग्रीमेंट के चलते ही हमारे द्वारा गृह निर्माण मंडल के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री करा दी गई है। इस रजिस्ट्री में जो पैसा अंकित किया गया है वह पैसा मिल के मजदूरों को चुकाए गए पैसे में नगर निगम की हिस्सेदारी के रूप में शामिल हो गया है। यही कारण है कि नगर निगम को इस रजिस्ट्री के बावजूद कोई पैसा नहीं मिल सका है।