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सुमित को मिला 5 विधायकों का साथ, रायशुमारी में भी पहले नंबर पर रहे

January 31, 2025

  • शहर अध्यक्ष ने भाजपा कार्यालय पर मत्था टेका तो ग्रामीण के अध्यक्ष ने कांग्रेसमुक्त इंदौर की प्रतिज्ञा ली
  • इंदौर के भाजपा संगठन की कमान एक बार फिर विजयवर्गीय मेंदोला गुट के पास

इंदौर। पिछली बार भी सुमित मिश्रा (sumit mishra) अध्यक्ष (Chairman) की दौड़ में थे, लेकिन उनका नाम पीछे रह गया था। इस बार पुरजोर तरीके से उन्हें 5 विधानसभाओं (5 Assemblies) के विधायकों का साथ मिला और रायशुमारी (referendum) में भी वे नंबर वन रहे। हालांकि टीनू जैन ने भी काफी प्रयास किए, लेकिन सुमित के नाम पर मुहर लग गई। अब भाजपा की क्षेत्रीय राजनीति में एक बार फिर विजयवर्गीय-मेंदोला गुट का दबदबा देखने को मिलेगा।



शुरुआत से ही सुमित मिश्रा मंडल अध्यक्षों और विधायकों की रायशुमारी में आगे चल रहे थे। उन्हें मंत्री विजयवर्गीय और विधायक रमेश मेंदोला के साथ-साथ तीन नंबर के विधायक गोलू शुुक्ला, पांच नंबर के विधायक महेंद्र हार्डिया का भी साथ मिला। राऊ विधायक मधु वर्मा ने अपने मंडल अध्यक्षों को फ्री कर दिया था कि वे किसी का भी नाम दे सकते हैं। कई मंडल अध्यक्षों ने सुमित का नाम ही रायशुमारी में दिया। चार नंबर से जरूर निवर्तमान अध्यक्ष गौरव रणदिवे का नाम आगे बढ़ाया गया था। इस तरह से पांच विधानसभाओं से सुमित का नाम एकतरफा गया और जब भोपाल में मीटिंग के बाद पैनल बनाया गया था तो सुमित का नाम पहले नंबर पर था और टीनू जैन का नाम दूसरे नंबर पर। वहीं विजयवर्गीय, मेंदोला और शुक्ला तीनों ही सुमित के नाम को लेकर लगातार लगे हुए थे। हालांकि 27 जनवरी को जब मुख्यमंत्री मोहन यादव इंदौर में थे, तब मंच पर सुमित को मिल रही तवज्जो से काफी कुछ तय हो गया था कि वे अगले अध्यक्ष हो सकते हैं और मुुख्यमंत्री की ओर से भी हरी झंडी है। इसके बाद भोपाल में भी वरिष्ठ नेताओं से राय ली गई और कल सुमित को नगर अध्यक्ष की कमान सौंप दी गई। अब एक बार फिर नगर भाजपा संगठन की कमान विजयवर्गीय-मेंदोला गुट के पास आ गई है। इसे राजनीतिक गलियारों में विजयवर्गीय-मेंदोला गुट की एक बड़ी जीत के रूप में भी देखा जा रहा है।

आखिरकार कल दोपहर संगठन ने इंदौर के दोनों अध्यक्ष के मामले में चल रहा सस्पेंस खत्म कर ही दिया और दोनों के नामों की घोषणा कर दी। हालांकि इसके पहले खूब राजनीति हुई, लेकिन अंत में दो नाम ऐसे आए, जिनमें एक में विजयवर्गीय-मेंदोला गुट को संतुष्ट कर दिया गया तो दूसरा नाम संगठन की ओर से लाया गया, जिसको लेकर किसी को विरोध तक का मौका नहीं मिला। कल दोनों अध्यक्ष भाजपा कार्यालय पहुंचे। मिश्रा ने जहां भाजपा कार्यालय की चौखट पर मत्था टेका तो चावड़ा ने कांग्रेसमुक्त इंदौर करने की प्रतिज्ञा ली। अभी तक भाजपा ने जितने भी अध्यक्षों की घोषणा की, वह रात को की, लेकिन इंदौर की घोषणा को लेकर जो उत्सुकता और कयासों का दौर चल रहा था वह कल दोपहर में समाप्त कर दिया। इंदौर के अध्यक्ष पद पर अभाविप और युवा मोर्चा में सक्रिय रहे सुमित मिश्रा को 47 साल की उम्र में ही अध्यक्ष बनने का मौका मिल गया। कल घोषणा होने के बाद सुमित के घर समर्थकों का जमावड़ा लग गया। सुमित के भतीजे की शादी के कारण मेहमान भी बड़ी संख्या में उनके घर पर थे। वे भी जश्न में शामिल हो गए। इसके बाद सुमित पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, विधायक रमेश मेंदोला और गोलू शुक्ला से मिलने पहुंचे और शाम को भाजपा कार्यालय पहुंचते ही मत्था टेका और कहा कि ये मेरी कर्मभूमि है और आज मुझे पार्टी ने जो जवाबदारी है, उसको लेकर इसे मंदिर की तरह मानकर काम करूंगा। मीडिया के गुटबाजी के सवालों पर कहा कि भाजपा परिवार एक है और हमारे यहां किसी प्रकार की गुटबाजी नहीं रहती है जो दावेदार थे, उनको साथ लेकर काम करूंगा। जल्द ही वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पदभार ग्रहण करूंगा। वहीं श्रवण चावड़ा को भी 40 साल की उम्र में ही अध्यक्ष बनने का मौका मिल गया। श्रवण भी संगठन में विभिन्न पदों पर रहे हैं और युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष पद पर भी रह चुके हैं। श्रवण भी कल शाम अपने समर्थकों के साथ भाजपा कार्यालय पहुंचे और वहां दीनदयाल उपाध्याय तथा श्यामाप्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया, लेकिन कुर्सी पर नहीं बैठे। उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि मोदीजी ने कांग्रेसमुक्त भारत की परिकल्पना की है, उसको लेकर वे इंदौर को कांग्रेसमुक्त करेंगे और भाजपा का दायरा बढ़ाएंगे। उन्होंने भी मुहूर्त के अनुसार वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में पदभार ग्रहण करने की बात कही। करीब आधे घंटे तक दोनों अध्यक्ष कार्यालय पर रहे। इस दौरान बड़ी संख्या में उनके समर्थक पहुंचे और दोनों को बधाइयां दीं।

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