भोपाल। मप्र सचिवालय कर्मचारी संघ के चुनाव का ऐलान नवंबर के पहले हफ्ते में हो चुका है। इस बीच राज्य सचिवायल कर्मचारी संघ की ओर से कथित तौर पर चुनाव प्रक्रिया के बीच निर्वाचन अधिकारी को हटाने पर बवाल मच गया है। कर्मचारी नेता निवार्चन अधिकारी को हटाने को लेकर आमने-सामने आए गए हैं। खुद निर्वाचन अधिकारी संतोष ठाकुर ने आज मुख्य सचिव , अपर मुख्य सचिव जीएडी, प्रमुख सचिव आईटी एवं पंजीयक फम्र्स एवं संस्थाओं को पत्र लिखकर कहा है कि चुनाव कार्यक्रम के बीच निर्वाचन अधिकारी को हटाकर मनमाफिक निर्वाचन अधिकारी को नियुक्त करना ट्रेड युनियन के संविधान एवं प्रजातांत्रिक तरीकों के खिलाफ है। ठाकुर ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में कहा है कि उनकी ओर से निर्वाचन अधिकारी की हैसियत से निर्वाचन कार्यक्रम जारी किया जा रहा है। जिसकी सूचना सभी पक्षों को भेजी जा चुकी है। निर्वाचन कार्यक्रम के अनुसार निष्पक्ष निर्वाचन कराने के लिए प्रतिबद्ध हूं। निर्वाचन अधिकारी ने मप्र सचिवालय संघ के निष्पक्ष निर्वाचन के लिए पर्यवेक्षक नियुक्त करने की मांग की है।
1 नवंबर को हो चुका है चुनाव का ऐलान
निर्वाचन अधिकारी संतोष ठाकुर ने कहा है कि मप्र सचिवालय कर्मचारी संघ के चुनाव का ऐलान उन्होंने 1 नवंबर को दिया है। जिसके तहत नवंबर महीने में चुनाव होना है। सभी पक्षों को इसकी सूचना दी गई थी। इसी दिन उन्हें सोशल मीडिया पर सूचना मिली थी कि मप्र सचिवालय कर्मचारी संघ के लेटर हेड पर नए निर्वाचन अधिकारी सहायक निर्वाचन अधिकारी का मनोनयन किया गया है। जबकि चुनाव कार्यक्रम के बीच नए निर्वाचन अधिकारी एवं सहायक निर्वाचन अधिकारी का मनोनयन सरासर गलत है। यह कृत्य संघ के निर्वाचन का मखौल उड़ाने जैसा है। ठाकुर ने कहा कि मप्र सचिवालय कर्मचारी संघ की कार्यकारिणी द्वारा निर्वाचन से पूर्व उन्हें चुनाव निर्वाचन अधिकारी बनाया था।
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