नई दिल्ली (New Delhi) । भाजपा (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा (National President JP Nadda) के केंद्र सरकार में शामिल होने के बाद पार्टी में बड़े संगठनात्मक बदलावों की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। पार्टी अगले माह से नए सदस्यता अभियान के साथ संगठनात्मक चुनावों (Organizational elections) की प्रक्रिया शुरू करेगी। नड्डा का अध्यक्षीय कार्यकाल जनवरी 2023 में समाप्त हो गया था, लेकिन उनको लोकसभा चुनावों तक विस्तार दिया गया था। जब तक पार्टी नए अध्यक्ष का चुनाव नहीं करती है, तब तक वह अध्यक्ष बने रह सकते हैं। हालांकि, केंद्र में मंत्री बनने के कारण रोजमर्रा के कामकाज के लिए कार्यकारी अध्यक्ष की नियुक्ति भी की जा सकती है या संसदीय बोर्ड नया अध्य़क्ष भी नियुक्त कर सकता है।
भाजपा अध्यक्ष नड्डा ने मंगलवार को मंत्रालय का कार्यभार संभालने के पहले पार्टी मुख्यालय जाकर वहां पर पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। पार्टी में एक व्यक्ति एक पद लागू होने के कारण नड्डा की जगह नया अध्यक्ष चुना जाना तय है। वैसे भी नड्डा का विस्तारित कार्यकाल चल रहा था। सूत्रों के अनुसार, अगले माह से नए सदस्यता अभियान की शुरुआत के साथ व्यापक संगठनात्मक बदलावों की प्रक्रिया शुरू होगी।
इस कड़ी में पहले मंडल, जिला और राज्यों के संगठन चुनाव होंगे। 50 फीसदी राज्यों के चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष का चुनाव होगा। हालांकि, भाजपा के संविधान में पार्टी की शीर्ष इकाई संसदीय बोर्ड को आपातकालीन परिस्थितियों में अध्यक्ष व उसके कार्यकाल से संबंधित फैसला करने की शक्ति है। सूत्रों ने बताया कि पार्टी का संसदीय बोर्ड नड्डा के स्थान पर नए अध्यक्ष के चयन के लिए चुनाव प्रक्रिया पूरी होने तक उनका कार्यकाल बढ़ा सकता है, या नया अध्यक्ष भी नियुक्त कर सकता है।
गौरतलब है कि साल 2019 के लोकसभा चुनावों के बाद भाजपा के तत्कालीन अध्यक्ष अमित शाह को जब सरकार में गृह मंत्री बनाया गया था तो नड्डा को इसका कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। बाद में जनवरी 2020 में वह पार्टी के पूर्णकालिक अध्यक्ष चुने गए। इसलिए यह संभावना भी बनती है कि पार्टी किसी को कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में नियुक्त कर दे, क्योंकि संगठनात्मक चुनावों के पूरा होने में लगभग छह माह का समय लगेगा। 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में नड्डा को अपने मंत्रिमंडल में शामिल नहीं किया था, जिससे साफ संकेत थे कि एक अनुभवी नेता के रूप में नड्डा पार्टी के संगठन को संभालेंगे।
हालांकि, नड्डा के संभावित विकल्प को लेकर अब तक कोई स्पष्टता नहीं हैं। क्योंकि, अधिकांश अनुभवी नेता (जिन्हें संभावित विकल्प के रूप में देखा जा रहा था) अब सरकार का हिस्सा हैं। पार्टी अपने राज्य के प्रमुख चेहरों या अपने राष्ट्रीय महासचिवों में से किसी को शीर्ष पद पर पदोन्नत कर सकती है। कुछ प्रदेश अध्यक्षों में भी बदलाव किए जाने हैं।
लोकसभा के चुनाव नतीजों को देखते हुए उत्तर प्रदेश में भी नए चेहरे को मौका दिए जाने की संभावना है। पश्चिम बंगाल में भाजपा अध्यक्ष सुकांत मजूमदार केंद्रीय मंत्री बन गए हैं, जबकि बिहार के अध्यक्ष सम्राट चौधरी राज्य में उपमुख्यमंत्री हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी राज्य में पार्टी के प्रमुख हैं। तेलंगाना में भी केंद्रीय मंत्री जी किशन रेड्डी अध्यक्ष पद भी संभाल रहे हैं। गुजरात के अध्यक्ष सी आर पाटिल भी केंद्र में मंत्री बन गए हैं। राजस्थान भाजपा अध्यक्ष सीपी जोशी को पार्टी के सामाजिक समीकरण को साधने के लिए बदला जा सकता है, क्योंकि राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा भी उन्हीं की तरह ब्राह्मण हैं।
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