
- उज्जैन में भी एक क्लिक पर मिलेगी जमीन संबंधी सभी जानकारी
उज्जैन। जमीन संबंधी जानकारी के लिए अब लोगों को जिला राजस्व कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। क्योंकि सरकार ने 2008 से पहले का राजस्व रिकॉर्ड ऑनलाइन करने की प्लान तैयार किया है। यह कार्य आने वाले तीन सालों में पूरा किया जाएगा। बता दें कि साल 2008 के बाद का राजस्व संबंधी पूरा रिकॉर्ड ऑनलाइन तो है ही।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार ने अपने पूरे राजस्व रिकॉर्ड को डिजिटल करने का फैसला लिया है। इसके तहत सभी जिलों, तहसीलों और गांवों के राजस्व कायर्यालयों में रखे गए पुराने दस्तावेज को डिजिटल माध्यम में परिवर्तित किया जाएगा। इससे लोगों को अपनी जमीन संबंधी जानकारी के लिए राजस्व कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। एक क्लिक पर पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। अनुमान है कि 2008 के पहले के करीब 15 करोड़ राजस्व दस्तावेज का कम्प्यूटरीकरण इन्हें ऑनलाइन कर दिया जाएगा। राजस्व रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण प्रदेश सरकार की दूरदर्शी योजना है, जो राज्य में भूमि प्रबंधन को आधुनिक और पारदर्शी बनाने में सहायक होगी। इससे न केवल लोगों को सुविधा मिलेगी, बल्कि सरकारी तंत्र भी अधिक प्रभावी और सुगम होगा। इससे प्रदेश में भूमि स्वामित्व संबंधी विवादों में कमी आएगी और विकास कार्यों को गति मिलेगी। राजस्व विभाग ने इस काम को पूरा करने के लिए एजेंसी का चयन करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस परियोजना का नाम डिजिटलीकरण ऑफ लीगेसी रिकॉर्ड्स रखा गया है। इसमें डॉक्युमेंट मैनेजमेंट सिस्टम (डीएमएस) और डेटा बेस एंट्री सॉल्यूशन (डीबीईएस) का उपयोग किया जाएगा। परियोजना को पूरा करने में करीब ढाई साल लगेंगे। इसके तहत ए-3 साइज यानी बड़े नक्शे और अन्य रिकॉर्ड्स के सात करोड़ और ए-4 साइज के आठ करोड़ दस्तावेज का डिजिटलीकरण किया जाएगा। राजस्व विभाग का मानना है कि नई और उन्नत तकनीक अपनाने से सरकारी दफ्तरों में होने वाली अनियमितताओं को भी रोका जा सकेगा। अभी रेवेन्यू कोर्ट मैनेजमेंट, सर्वे और वेब जीआईएस जैसी सर्विस चल रही हैं।
यह दस्तावेज होंगे ऑनलाइन
डिजीटल योजना के चलते खसरा नंबर, जमाबंदी, म्यूटेशन रजिस्टर, रिकॉर्ड ऑफ राइट्स, नंवरिंग लिस्ट, निस्तार पत्रक, वाजिब-उल-अर्ज, राजस्व न्यायालय मामलों का रिकॉर्ड, सी-2 रजिस्टर और अन्य दस्तावेज जैसे- प्रमाण पत्र, सरकारी आदेश आदि का रिकॉर्ड ऑनलाइन होने से लोगों को कई फायदे होंगे। इसके बाद लोगों को राजस्व कामों के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने होंगे। साथ ही रिकॉर्ड में पारदर्शिता आएगी और भ्रष्टाचार पर लगाम लगेगी। वहीं जमीन संबंधी विवादों को हल करने में आसानी होगी।