उज्जैन। नगर निगम के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग में पानी के बड़े बकायादारों पर अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। छोटे-बड़े शासकीय-अशासकीय मिलाकर 43 करोड़ रुपए के पानी के बकायादार है। अब मार्च महीने तक इसे वसूली का अभियान चलाया जा रहा है। इसके लिए विभाग नोटिस भी जारी कर रहा है।
सरकार का सबसे बड़ा घाटे का विभाग नगर निगम का लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग है। यहाँ सरकार का पैसा तो खूब लगता है लेकिन वसूली नहीं होती है। जल कर के रूप में न्यूनतम राशि देना होती है लेकिन वह भी उपभोक्ता समय से नहीं भरते। ऐसे में विभाग के छोटे-बड़े मिलाकर अशासकीय और शासकीय उपभोक्ता की संख्या हजारों में पहुँच गई है और इससे करीब 43 करोड़ रुपए बकाया है। महापौर परिषद के लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी के प्रभारी पार्षद प्रकाश शर्मा ने बताया मार्च माह तक यह अभियान चलाया जाएगा। इसमें शहर के होटल, स्टे होम आदि पर विशेष ध्यान दिया जाएगा कि इनसे जल कर व्यवसायिक रूप में वसूल हो रहा है या नहीं। वहीं शहर के जो भी बड़े बकायदार हैं चाहे वह अशासकीय हो या शासकीय सभी की सूची बनाई गई है और उनके नाम चौराहों पर फ्लेक्स में डिस्प्ले किए जाएँगे। शहर के हर टंकी प्रभारी को लक्ष्य दिया गया है और 43 करोड़ की वसूली के लिए बड़े बकायदारों को 3 हजार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। बकाया वसूली में से आधी से अधिक वसूली मार्च तक हो इसके पूर्ण प्रयास किए जाएँगे और उसके लिए विभाग के हर कर्मचारी को घर-घर भेजा जाएगा और वसूली की जाएगी। ताकि नगर निगम की आय बढ़ सके और जनता को सुविधापूर्ण तरीके से स्वच्छ जल मिल सके।
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