इस्लामाबाद (Islamabad)। लगभग डेढ़ साल पहले 16 जनवरी 2023 को पाकिस्तान (Pakistan) के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ (Prime Minister Shahbaz Sharif) ने दुबई में अल अरबिया चैनल को एक इंटरव्यू दिया था। इसमें उन्होंने भारत और पाकिस्तान के संबंधों (Relations between India and Pakistan) पर बात की थी। तब शरीफ ने कहा था कि ‘यह हम पर निर्भर करता है कि हम शांति से रहें और प्रगति करें या एक दूसरे से लड़ाई करें और समय व संसाधन बर्बाद करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) को मेरा संदेश है कि आइए बैठें और कश्मीर जैसे हमारे ज्वलंत मुद्दों को हल करने के लिए गंभीर और ईमानदार बातचीत करें।’ 2019 में भारत के जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किए जाने के बाद यह पहली बार था जब किसी पाकिस्तानी प्रधानमंत्री ने बातचीत की इच्छा जाहिर की है। जनवरी 2023 से बहुत कुछ हो चुका है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था में गिरावट जारी है और उसके यहां से लगातार भारत से व्यापार शुरू करने की बात उठती रही है। हालांकि, भारत ने इस पर कोई रुचि नहीं दिखाई है। आखिर क्या वजह है जो पाकिस्तान व्यापार के लिए भारत से गिड़गिड़ा रहा है।
भारत से व्यापार की पाकिस्तान की गुहार
पाकिस्तान में इसी साल पीएमएल-एन के नेतृत्व वाली गठबंधन सरकार गठित होने के बाद भारत के साथ कई बार व्यापार की अनौपचारिक पेशकश कर चुका है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से लेकर विदेश मंत्री अपने हालिया बयानों में ऐसे संकेत दे चुके हैं। पीएमएल-एन के दूसरे नेता इन बयानों का समर्थन करते हैं। पाकिस्तान के दो बार वित्त मंत्री रहे डॉ. मिफ्ताह इस्माइल का मानना है कि पाकिस्तान को हर विवाद को छोड़कर भारत के साथ व्यापार करना चाहिए। पाकिस्तानी अखबार डॉन से बात करते हुए उन्होंने कहा, ‘सभी व्यापार फायदेमंद होते हैं। चीन और ताइवान के बीच विवाद है, लेकिन उनका व्यापार फल-फूल रहा है। भारत और चीन के बीच विवाद है, लेकिन उनका व्यापार फल-फूल रहा है। चीन और भारत के बीच सीमा पर झड़पें होती हैं, लेकिन वे एक-दूसरे के साथ व्यापार करते हैं।
कंगाली में पूरी तरह से डूबा पाकिस्तान
पाकिस्तान को समझ में आ गया है कि बातचीत करना लड़ने से बेहतर है। इसकी वजह है। पाकिस्तान सभी सूचकांकों में लगातार गिरता जा रहा है और ऐसे कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं जो यह बताएं कि आखिर यह बेहतरी की ओर बढ़ेगा। पिछले दो सालों में देश सभी मामलों में पिछड़ गया है और लगातार नीचे की तरफ जा रहा है। पाकिस्तान पिछले साल दिवालिया होते-होते रह गया था। हाल ही में उसने खुद को आर्थिक संकट से निकालने के लिए अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ 7 अरब डॉलर के कर्ज पर कर्मचारी स्तर के समझौते पर सहमति बनी है।
भारत को क्या करना चाहिए?
अक्सर यह तर्क दिया जाता है कि विवादों के कारण संपर्क को नहीं रोकना चाहिए। दोनों देशों के संबंधों में उतार चढ़ाव को देखते हुए इस तरह के तर्कों का यह पहला मौका नहीं है। यह तर्क दिया जाता है कि जब भारत और पाकिस्तान व्यापार शुरू करेंगे तो सब ठीक हो जाएगा। यहां ये ध्यान रखना जरूरी है कि यह तर्क गलत है कि व्यापार के साथ शांति भी आती है। पाकिस्तान की आदत है कि जब भी भारत उसकी तरफ दोस्ती का हाथ बढ़ाता है, वह पीठ में खंजर भोंकता है। हाल ही में जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद की तेजी उसकी संलिप्तता का संकेत दे रही है। कश्मीर में आतंकियों के कब्जे से ऐसे हथियार मिले हैं, जो पाकिस्तान के रास्ते ही भारत में पहुंचे हैं। ऐसे में भारत को पाकिस्तान के साथ सावधान रहने की जरूरत है।
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