
- बढ़ते क्षेत्रफल के हिसाब से संसाधनों के साथ स्थाई और अनुभवी कर्मचारियों का हैं अभाव
उज्जैन। शहर में बढ़ते क्षेत्रफल के साथ अब आगजनी की घटनाओं भी संभावना बढ़ रही है, लेकिन उन पर काबू पाने के लिए नगर निगम के पास न तो पर्याप्त संसाधन हैं न ही स्थाई कर्मचारी। आलम यह है कि दैनिक वेतन भोगी और आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे ही नगर निगम की फायर शाखा चल रही है।
उल्लेखनीय है कि लंबे समय से उज्जैन नगर निगम की फायर ब्रिगेड में भर्ती नहीं हुई। विभाग में जो स्थाई कर्मचारी हैं, वो भी 50 साल के ऊपर हो चुके हैं। इसके अलावा नगर निगम की फायर शाखा में संसाधनों की भी भारी कमी है। कहने को यहां 5 फायर फास्टर हैं, अन्य साधन हैं। जो 20 से 25 साल पुराने हो चुके हैं। एक-दो गाडिय़ाँ तो 1992 की खरीदी हुई है। रिकॉर्ड के मुताबिक वर्तमान में नगर निगम की फायर शाखा में 18 स्थाई, 59 दैनिक वेतन भोगी और 25 आउटसोर्स कर्मचारी हैं। इसमें भी केवल 20 कर्मचारी ही प्रशिक्षित हैं, जो मस्टर रोल पर हैं। बाकी शेष सभी कर्मचारी सहायकों के तौर पर सेवाएं दे रहे हैं। जिन्हें आगजनी की घटनाओं होने पर बुलाना पड़ता है।
यह भी हैं चुनौतियाँ
- निगम के पास दो फायर बाइक हैं, जो बंद है।
- शहर में कमर्शियल बिल्डिंग की हाइट ज्यादा है। ऊपरी हिस्सा में प्रेशर से पानी पहुंचाने में दिक्कतें होती हैं।
- पुराने शहर के प्रमुख बाजारों में फायर ब्रिगेड की गाडिय़ों को खड़ा करने के लिए एक चिन्हित स्थान नहीं है।