
- नियमों का पालन कराने में स्वास्थ्य विभाग नाकाम
उज्जैन। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक शहर में 84 पैथोलॉजी सेंटर जाँच के लिए अधिकृत हैं जबकि चल रही हैं 100 से ऊपर। हैरानी की बात यह है यह सारा गोलमाल स्वास्थ्य महकमे की नाक के नीचे चल रहा हैं और इन्हें रोकने टोकने वाला भी कोई नहीं हैं।
उल्लेखनीय है कि शहर में संचालित पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटर्स पर पैथोलॉजी की जांचें तो हो रही हैं, लेकिन कई सेंटर ऐसे भी हैं, जो बिना योग्यता एवं पंजीयन के संचालित हो रहे हैं। कई के वहाँ पंजीकृत लैब टेक्नीशियन तक नहीं हैं। हाल यह है कि शहर और देहात में गली-मोहल्लों में बिना पंजीकरण के पैथोलॉजी की दुकानें सजी मिल जाएँगी। बड़े-बड़े बोर्ड लगे हैं, जिन पर मधुमेह, रक्त एलएफटी, केएफटी, डेंगू, मलेरिया की जाँच होने का जिक्र है। ऐसा नहीं है कि जिले में बिना पंजीकरण के चल रहे पैथोलॉजी लैब के बारे में स्वास्थ्य महकमे को जानकारी नहीं है। बावजूद इसके कार्रवाई करने में उदासीनता बरती जा रही है। आंकड़ों पर नजर डाले तो उज्जैन में 84 पैथोलॉजिस्ट हैं, लेकिन शहर के लेकर देहात तक 100 से अधिक बिना पंजीकरण और प्रशिक्षित स्टॉफ के लैब संचालित हैं। ऐसे में मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग केवल शिकायत आने पर ही कार्रवाई करता है। दअरसल, शहर में संचालित पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटरों पर स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी इतनी बढ़ गई है कि रोजाना सैकड़ों अनचाहा गर्भपात हो रहे हैं। इसके लिए वे पैसा तो अधिक लेते ही हैं, साथ ही गर्भाशय की सफाई के नाम पर कुछ न कुछ गड़बड़ी पैदा कर देते हैं। इससे महिलाओं में बांझपन व अस्वस्थ रहने का खतरा और अधिक बढ़ जाता है। उज्जैन स्वास्थ विभाग को भी शिकायतें मिल रही हैं कि शहर में संचालित पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटर्स पर गर्भपात और कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा दे रहे हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग के अफसरों को चाहिए कि वे शहर में अवैध रूप से संचालित पैथोलॉजी कलेक्शन सेंटरों की जाँच करें। जाँच में यह परखा जाए कि कहीं गड़बड़ी तो नहीं है, यदि उनमें गड़बड़ी मिले तो उन्हें तत्काल बंद करने के साथ ही संचालक के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें।