उज्जैन। महिला थाने में इन दिनों एक विचित्र स्थित बन गई है। थाना प्रभारी के रूप में पुरुष अधिकारी को नियुक्त कर दिया गया है। यह चौंकाने वाला इसलिए भी है कि बीते 30 सालों में तीसरी बार महिला थाने का जिम्मा पुरुष प्रभारी को सौंपा गया हैं। ऐसे में अधिकांश महिलाएँ अपनी शिकायत व फरियाद बिना सुनाए ही लौट रही हैं।
उल्लेखनीय है कि शहर के अधिकतर थानों में पुरुष प्रभारी पदस्थ हैं। महिला थाना ही एक मात्र ऐसा है, जहाँ महिला अधिकारी होती थी, इसीलिए अधिकांश महिलाएँ शिकायत करने महिला थाने आती हैं लेकिन अब वह भी नहीं हैं। आम तौर पर महिला अधिकारी से बात करने में महिलाओं को कोई संकोच नहीं होता हैं, वे अपनी सारी परेशानी उनसे खुलकर शेयर कर सकती है। परंतु पुरुष अधिकारी के सामने उन्हें हिचक होती है। इसके अलावा महिलाओं की यह भी धारणा रहती है कि महिला अधिकारी अधिक संवदेनशील होती हैं इसलिए उनके सामने अपनी समस्या रखने से निराकरण जल्दी होगा। पुरुष प्रभारी पर महिलाओं को विश्वास भी कम होता हैं। महिला थाना में लगी थाना प्रभारियों की सूची के मुताबिक 2018 के बाद अब तक सिर्फ दो पुरुष अधिकारी यहाँ प्रभारी के रूप में पदस्थ हुए। वहीं पुलिस सूत्रों की मानें तो 2018 के पहले भी एक या दो बार ही महिला थाने में पुरुष प्रभारी को नियुक्त किया गया था। ऐसे में यह कहा जा सकता हैं कि बीते बीते 30 सालों में तीसरी बार महिला थाने का जिम्मा पुरुष अधिकारी को दिया गया है।
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