नई दिल्ली । लोकसभा(Lok Sabha) में वक्फ बिल(Wakf Bill) पर चर्चा के दौरान हैदराबाद सांसद असदुद्दीन ओवैसी(Hyderabad MP Asaduddin Owaisi) ने सरकार(Government) पर जोरदार हमला(Strong attack) किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ बिल के जरिए मुसलमानों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार वक्फ बिल पर देश में भ्रम फैला रही है। इस बिल से ये तो साफ हो गया है कि प्राचीन मंदिरों की हिफाजत होगी, लेकिन मस्जिदों की नहीं। इस बिल का मकसद मुसलमानों को जलील करना है, मैं इस कानून को फाड़ता हूं।
असदुद्दीन ओवैसी ने लोकसभा में वक्फ बिल पर चर्चा के दौरान कहा कि वे सरकार द्वारा लाए गए वक्फ संशोधन बिल 2025 का पुरजोर तरीके से विरोध करते हैं। वक्फ बिल मुसलमानों के साथ अन्याय है। बिल पर बीजेपी झूठ फैला रही है। वक्फ एक धार्मिक संस्थान है। सरकार द्वारा लाया जा रहा यह बिल संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन है। इस बिल का मकसद मुसलमानों को जलील करना है।
वक्फ बिल का मकसद मुसलमानों को जलील करना
ओवैसी ने बिल के मसौदे पर कहा कि यह बिल इस तरह से है कि जैसे आप मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ला सकते हैं, लेकिन वक्फ का जो अध्यक्ष होगा, उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। नोमिनेट भी स्टेट गवर्नमेंट करेगी। यह कैसा लोकतंत्र है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस बिल का मकसद मुसलमानों को जलील करना है, मैं गांधी की तरह वक्फ बिल को फाड़ता हूं।
आपको मुसलमानों से इतनी नफरत क्यों
ओवैसी ने कहा, “सब हिंदू धर्म की संपत्ति है, अन्य धर्मों की संपत्ति पर उनके सदस्य हैं। लेकिन सिर्फ वक्फ में ऐसा नहीं होगा। आपको मुसलमानों से इतनी नफरत क्यों है? गृह मंत्री अमित शाह जी ने कहा कि 2013 में ऐसा होता तो हम नहीं लाते। उस वक्त राजनाथ साहब, सुषमा स्वराज, आडवाणी जी बैठे थे, तब क्यों पास होने दिया। मुझे कंफ्यूजन है कि आपके लिए कौन बड़े हैं, अटल, आडवाणी या मोदी जी।”
इससे पहले लोकसभा में वक्फ बिल पर बहस में भाग लेते हुए अमित शाह ने कहा था कि यदि 2013 में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूपीए-2 सरकार के दौरान वक्फ (संशोधन) अधिनियम पारित नहीं हुआ होता, तो नए कानून की आवश्यकता नहीं पड़ती।
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