उज्जैन। धार्मिक नगरी उज्जैन (Ujjain) में बाबा महाकाल (Baba Mahakal) के दर्शन करने आने वाले श्रद्धालु उनके सेनापति भगवान कालभैरव (Lord Kalbhairav) के दर्शन करने जरूर जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब तक कालभैरव के दर्शन नहीं किए जाते है, तब तक बाबा महाकाल के दर्शन करने का पुण्य लाभ नहीं मिलता है। ऐसे में महाकालेश्वर मंदिर के साथ ही प्रतिदिन कालभैरव मंदिर पर भी श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। भगवान कालभैरव को मदिरा का भोग (Offering of Liquor) भी लगता है। लेकिन, मध्यप्रदेश के 19 क्षेत्रों में 1 अप्रैल से लागू की गई शराबबंदी के बाद अब उज्जैन में नए नियम लागू हो चुके हैं, जिसके तहत नगर निगम की परिसीमा में शराब के विक्रय पर रोक लगा दी गई है। स्थिति यह बन चुकी है कि भगवान कालभैरव के दर्शन करने पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को भी मंदिर के बाहर भगवान को भोग लगाने के लिए शराब नहीं मिल पा रही है।
नए नियमों के तहत नगर निगम की परिसीमा में शराबबंदी किए जाने से कालभैरव को मदिरा का भोग लगाने के लिए श्रद्धालुओं को अब अपने साथ ही शराब खरीदकर मंदिर पहुंचना होगा। क्योंकि, यह मंदिर नगर निगम की सीमा के अंतर्गत आता है। इसीलिए मंदिर के बाहर उन्हें कालभैरव को मदिरा का भोग लगाने के लिए शराब नहीं मिल पाएगी। शराबबंदी के नियमों का पालन करने के लिए पुलिस विभाग पूरी तरह सख्त है। यही कारण है कि शहर में आने वाले मुख्य मार्गों पर चेकिंग की जा रही है और निर्धारित मात्रा से अधिक शराब ले जाने वाले लोगों को पकड़कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
धार्मिक नगरी उज्जैन में शराबबंदी लागू होने के बाद इसका पालन भी शुरू हो चुका है। नगर निगम सीमा में शराब का विक्रय न हो, इसके लिए पुलिस पूरी मुस्तैदी से धरपकड़ कर रही है। वहीं, प्रशासनिक अधिकारियों ने भी कालभैरव मंदिर क्षेत्र के दुकानदारों को एफिडेविट देना अनिवार्य किया है कि वे इस क्षेत्र में शराब नहीं बेचेंगे।
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