नई दिल्ली । कर्नाटक हाई कोर्ट (Karnataka High Court) ने बुधवार को रैपिडो बाइक (Rapido Bike) टैक्सी समेत सभी तरह की बाइक टैक्सियों (Bike Taxis) की सेवा बंद करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट ने अपने आदेश में सभी टैक्सी एग्रीगेटर्स से अगले छह सप्ताह के अंदर राज्य में परिचालन बंद करने का आदेश दिया है। जस्टिस बी श्याम प्रसाद की पीठ ने अपने आदेश में रैपिडो की मूल कंपनी रोपेन ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के साथ ही उबर और ओला (ANI टेक्नोलॉजीज) जैसी सभी बाइक टैक्सी सेवा उपलब्ध कराने वाली कंपनियों और एग्रीगेटर्स का याचिका खारिज करते हुए यह आदेश दिया है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ताओं ने अपनी अर्जी में ऐसे वाहनों को भी ट्रांसपोर्ट व्हिकल्स के रूप में पंजीकृत करने की अनुमति देकर बाइक टैक्सियों को कानूनी रूप से मान्यता देने के निर्देश देने की मांग की थी, जिसमें इंटरनल कम्बशन इंजन फिटेड थे। इसके अलावा अर्जी में यह भी अनुरोध किया गया था कि कोर्ट अधिकारियों को बाइक टैक्सियों के लिए एक कानूनी ढांचा लागू करने का निर्देश दें।
रैपिडो ने अपनी याचिका में क्या मांग की थी?
रैपिडो, जो पहले से ही बाइक टैक्सी सेवाएं प्रदान कर रहा था, ने अपनी अर्जी में अधिकारियों को उनके व्यवसाय में हस्तक्षेप ना करने का निर्देश देने की मांग की थी। दरअसल, अप्रैल 2022 में, जस्टिस ज्योति मिलिमनी की पीठ ने इन अर्जियों पर सुनवाई करते हुए अधिकारियों को याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कार्रवाई करने से रोक दिया था और ऐसा आदेश जारी कर याचिकाकर्ताओं को अंतरिम राहत प्रदान की थी। यह अंतरिम राहत आज तक जारी थी, जिसकी वजह से रैपिडो बाइक टैक्सियाँ अपना परिचालन जारी रखे हुई थीं।
2022 से मिली हुई थी अंतरिम राहत
जस्टिस प्रसाद ने पहली बार इस मामले की सुनवाई 2023 में की थी। आज उन्होंने उन सभी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि हाई कोर्ट न तो राज्य सरकार को याचिकाकर्ताओं द्वारा अनुरोध किए नियम बनाने का आदेश दे सकता है और न ही राज्य को गैर-परिवहन योग्य वाहनों को परिवहन वाहनों के रूप में पंजीकृत करने का आदेश दे सकता है। इसकेसाथ ही कोर्ट ने कहा कि बाइक टैक्सी एग्रीगेटर्स को छह सप्ताह के भीतर सभी परिचालन बंद करने होंगे।
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