न मंजिलों को न हम रहगुजऱ को देखते हैं
अजब सफऱ है कि बस हम-सफऱ को देखते हैं।
आज हमारे उन सहाफियों (पत्रकारों) का जि़क्र करेंगे जिन्होंने नए मीडिया इदारों को ज्वाइन किया है। सबसे पेले सीनियर सहाफी कृष्णमोहन झा साब के बारे में जान लीजिए। झा साब ने मुल्क के सबसे जपाट (बड़े) टीवी न्यूज नेटवर्क सहारा समय के एमपी न्यूज़ हेड की जि़म्मेदारी संभाल ली है। अपनी चौथाई सदी से ज़्यादा की सहाफत में जनसत्ता, देशबन्धु सहित कई रोजनामचों और न्यूज़ चैनल्स में रहे। कृष्णमोहन झा भेतरीन टाइप के सियासी तज़बियाकार, मुसन्निफ़ (लेखक) और कालमनिगार भी हैं। इनकी सहाफी सलाहियतों का फायदा एमपी विधानसभा की शोध पत्रिका विधायिनी सहित मुल्क के सैकड़ों अखबार और रिसाले उठाते रहे हैं। आप डिजियाना में 5 बरस तक एडिटर इन चीफ के ओहदे पे भी रहे। गुजिश्ता दिनों आपको सहारा न्यूज़ के राष्ट्रीय प्रमुख राजेश कुमार सिंह की मौजूदगी में इन्होंने स्टेट हेड की कुर्सी संभाली। उधर भोपाल के नोजवान सहाफी और आज की डिजिटल सहाफत में वीडियो कॉन्टेंट के एक्सपर्ट विकास वर्मा ने भास्कर डिजिटल को अलविदा के दिया।
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