नहीं तो पिछले साल से भी कम मिलता इंदौर में पंजीयन से राजस्व
इंदौर। पिछले वित्तीय वर्ष (Financial Year) के दौरान पांच गुना कीमत (five times price) पर कराई गई पांच रजिस्ट्री (five registrations) के कारण इंदौर (Indore) में पंजीयन से राजस्व संग्रहण की स्थिति सुधर सकी है। यदि ऐसा नहीं होता तो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में भी इंदौर का राजस्व कम होता।
पंजीयन विभाग को कल समाप्त हुए वित्तीय वर्ष के दौरान इंदौर में दस्तावेजों के पंजीयन से 2540 करोड़ रुपए की आय हुई है। पिछले वित्त वर्ष में यह आय 2414 करोड़ रुपए की थी। इस तरह से पिछले वर्ष की तुलना में 126 करोड़ रुपए की ज्यादा कमाई हुई है। राज्य सरकार द्वारा तो इंदौर को 3077 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रहित करने का लक्ष्य दिया गया था। सरकार हमेशा ही इंदौर को बड़ा और ऐसा लक्ष्य देती है, जिसे पाना संभव नहीं हो पाता है। अब इंदौर को जो राजस्व प्राप्त हुआ है उसकी जब पड़ताल की गई तो यह हकीकत उजागर होकर सामने आई कि पिछले वित्त वर्ष के दौरान गोदरेज सहित पांच कंपनियों द्वारा गाइड लाइन की कीमत से पांच गुना ज्यादा कीमत पर जमीन की खरीदी की रजिस्ट्री कराई गई है। इन दस्तावेजों के पंजीयन से ही विभाग को करीब 125 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके साथ ही वित्तीय वर्ष के समापन की बेला में नगर निगम द्वारा हुकमचंद मिल की जमीन की रजिस्ट्री मध्यप्रदेश गृह निर्माण एवं अधोसंरचना मंडल के नाम पर कराई गई। इससे विभाग को 27 करोड़ रुपए का राजस्व प्राप्त हुआ। इस तरह से इन रजिस्ट्री के माध्यम से ही विभाग के पास में 150 करोड़ रुपए का राजस्व आ गया। यदि यह रजिस्ट्री जो कि गाइड लाइन से पांच गुना कीमत पर हुई थी, उन्हें हटा दिया जाए तो विभाग पिछले साल की तुलना में कम ही राजस्व अर्जित कर सका है।
जहां तक दस्तावेजों के पंजीयन का प्रश्न है तो पिछले वित्त वर्ष में 1.76 लाख दस्तावेजों का पंजीयन हुआ था। कल समाप्त हुए वित्त वर्ष में 1.81 लाख दस्तावेजों का पंजीयन हुआ है। यह संख्या इसलिए बढ़ी है, क्योंकि दस्तावेज में त्रुटि होने पर उसे जब सुधार के लिए प्रस्तुत किया जाता है तो उसकी गणना भी पंजीयन के नए दस्तावेज के रूप में कर ली जाती है। यही कारण है कि दस्तावेजों के पंजीयन का आंकड़ा बढ़ा हुआ ज्यादा आता है।
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