ऑनलाइन फ्रॉड में सबसे अधिक असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सिम का हो रहा उपयोग
इंदौर। पूरे देश में ऑनलाइन फ्रॉड (online fraud) के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इन सब फ्रॉड में देखने में आ रहा है कि इनमें असम ( assam), ओडिशा (odisha) और पश्चिम बंगाल (west bengal) की सिम (sim) का उपयोग सबसे अधिक हो रहा है। कुछ मामलों में पुलिस सिम के आधार पर जब वहां पहुंची तो पता चला कि यहां गांव में टेलीकॉम कंपनी (telecom company) के एजेंट (agent) अपने यहां आए ग्राहक से पांच बार अंगूठा लगवा लेते हैं और उसे एक सिम दे देते हैं, जबकि बाकी की चार सिम ठगों को बेच देते हैं। जिसके नाम से सिम होती है उसे तो पता ही नहीं रहता कि उसके नाम से पांच सिम चल रही हैं।
कुछ सालों से शहर में ऑनलाइन फ्रॉड की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। हर जनसुनवाई (public hearing) में बीस प्रतिशत शिकायतें ऑनलाइन फ्रॉड की आने लगी हैं। केवल तरीके अलग-अलग होते हैं। कभी सैन्य अधिकारी बनकर, केवाईसी अपडेट (kyc update) के नाम पर, इंश्योरेंस पॉलिसी का पैसा दिलवाने के नाम पर, एप्लीकेशन डाउनलोड (application download) करने के नाम पर, बैंक अधिकारी बनकर, लॉटरी या फिर जॉब के नाम पर रोजाना ठगी के मामले समाने आते हैं। कई मामलों में केस दर्ज होते हैं तो कई शिकायत में ही चलते रहते हैं। लेकिन इन सबमें एक बात सामने आई है कि सभी में तीन राज्यों असम, ओडिशा और पश्चिम बंगाल की सिम का उपयोग हो रहा है, जबकि ठग कहीं और बैठे होते हैं। कुछ मामलों में इंदौर की क्राइम ब्रांच (crime branch) और साइबर सेल (cyber cell) जब सिम के जरिए आरोपियों तक पहुंची तो पता चला कि उनको तो पता ही नहीं है कि उनके नाम से कई सिम चल रही हैं। पुलिस को पता चला कि यहां देहात क्षेत्र में टेलीकॉम कंपनी के एजेंट नई सिम लेने आने वाले ग्रामीणों से वेरिफिकेशन के नाम पर पांच बार अंगूठा लगवा लेते हैं और उसे एक सिम दे देते हैं, बाकी की सिम ठगों को बेच देते हैं। इसके चलते यहां की सिम का उपयोग सबसे अधिक हो रहा है। दो दिन पहले हातोद पुलिस ने ठगी का केस दर्ज किया था। इसमें भी असम की सिम का उपयोग हुआ था, जिसके चलते असम के व्यक्ति को भी आरोपी बनाया गया है। आशंका है कि यह सिम भी इसी तरह खरीदी गई होगी।
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