इंदौर कलेक्टर की संवेदनशीलता के चलते प्रधानमंत्री केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना में इंदौर रहा अव्वल… सर्वाधिक प्रकरण हो गए मंजूर
इंदौर। 400 से अधिक बच्चों को प्रशासन (Administration) ने अपने स्तर पर मदद करवाई है, जिनके माता-पिता (parents) का निधन कोविड (covid) के चलते हो गया। दूसरी तरफ प्रधानमंत्री केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना (prime minister’s cares for children scheme) के तहत भी कलेक्टर (collector) ने संवेदनशीलता के साथ इन बच्चों के प्रकरण मंजूरी के लिए भिजवाए। 28 बच्चों के प्रकरण इस योजना के तहत मंजूर हो गए, जिन्हें 23 साल की उम्र में 10-10 लाख रुपए की आर्थिक सहायता (financial assistance) केंद्र सरकार (central government) से मिल जाएगी।
इस योजना में भी इंदौर जिला पूरे प्रदेश में अव्वल रहा, जहां सबसे अधिक प्रकरणों को केंद्र सरकार ने मंजूरी दी है। इस योजना के तहत पूरे देश में उन बच्चों की आर्थिक मदद (financial help) की जा रही है, जिन्होंने कोरोना महामारी (corona epidemic) के चलते अपने माता-पिता, अभिभावकों को खो दिया। अब उनके कल्याण, देखभाल, शिक्षा आदि के लिए यह योजना शुरू की गई है। कलेक्टर मनीष सिंह (Collector Manish Singh) ने कोरोना महामारी के दौरान माता-पिता खोने वाले तमाम बच्चों की मदद शुरू करवाई और अधिकारियों को उनका पालक भी बना दिया। पूरे जिले में 400 से अधिक ऐसे बच्चों की आर्थिक सहायता भी करवाई जा रही है। 28 बालक/बालिकाओं के प्रकरण कलेक्टर द्वारा स्वीकृत किए गए हैं। महिला एवं बाल विकास विभाग (women and child development department) के सहायक संचालक रामनिवास बुधोलिया ने बताया कि उक्त सभी 28 बालक/बालिकाओं के संयुक्त खाते पोस्ट ऑफिस में खोले जाने हेतु मुख्य पोस्ट ऑफिस जीपीओ इंदौर में आवेदन जमा किए गए हैं।
सिंगल पैरेंट्स वाले 412 बच्चों को भी कलेक्टर ने स्थानीय दानदाताओं से दिलवाई 1 करोड़ की मदद
कोरोना काल (corona period) में कई बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया तो कई बच्चों के सिंगल पैरेंट्स (single parents) यानी किसी की माता तो किसी के पिता का भी निधन हो गया। जिले में ऐसे 412 चिह्नित किए गए बच्चों को कलेक्टर मनीष सिंह (Collector Manish Singh) ने दानदाताओं से कई तरह की मदद बीते दिनों में करवाई है, जो कि एक करोड़ रुपए से अधिक की है। किसी के मकान का बैंक लोन जमा करवाया तो किसी की शिक्षा, स्वास्थ्य से लेकर अन्य समस्याएं निराकृत करवाई गईं। कलेक्टर ने इन बच्चों के अभिभावक के रूप में भी अपने अधीनस्थ अधिकारियों को जिम्मेदारी दी, जिसके चलते अपर कलेक्टर, एडीएम, एसडीएम से लेकर तहसीलदार तक इन बच्चों के संपर्क में तो रहते ही हैं, उनकी समस्याएं भी हल करवाते हैं। कई बच्चों के माता-पिता (parents) की संपत्तियों के संबंध में राजस्व रिकॉर्ड दुरुस्त करवाने से लेकर अन्य कई तरह की मदद भी करवाई गई।
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