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आपदा में देवदूत बनी भारतीय सेना, म्यांमार भूकंप पीड़ितों के राहत बचाव में जुटी, भारत का ऑपरेशन ‘ब्रह्मा’ जारी

  • March 30, 2025

    नई दिल्ली: दुनिया में किसी भी जगह कोई आपदा आती है तो सबस पहले मदद का हाथ भारत की तरफ से ही बढ़ाया जाता है. म्यांमार में भूकंप से हुई त्रास्दी में सबसे पहले भारत ने मदद भेजनी शुरू की. भारत सरकार की तरफ से चलाए जा रहे राहत बचाव ऑपरेशन ब्रह्मा में तीनों सेना ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है. भारतीय वायुसेना के ट्रांसपोर्ट विमान राहत सामग्री लेकर उड़ान भर रहे हैं. वही सेना अपने फील्ड ऑस्पताल के साथ म्यांमार में लैंड कर चुकी है. नौसेना के दो शिप भी राहत सामग्री लेकर यंगून पोर्ट पर पहुंच रहा है.

    भारतीय सेना हर स्थिति के लिए हमेशा तैयार रहती है. चाहे वह जंग हो या फिर कोई राहत बचाव का ऑपरेशन हो. सरकार की तरफ से जैसे ही म्यांमार में ऑपरेशन लॉन्च किया गया. सेना हरकत में आ गई . सेना को राहत बचाव के ऑपरेशन में महारत हासिल है. इसके लिए भारतीय सेना के 50(I) पैरा ब्रिगेड को तैनात किया गया. 118 स्पेशलिस्ट रेस्क्यू टीम अपने मेडिकल साजोसामान और कम्यूनिकेशन यूनिट के साथ 29 मार्च को रवाना की गई. वायुसेना का C-17 म्यांमार के समयानुसार रात 1130 बजे ने पी ताव अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर लैंड हुआ. टीम को रिसीव करने के लिए खुद म्यांमार में भारत के राजदूत मौजूद थे.


    स्पेशलाइज उपकरण के साथ सेना का फील्ड अस्पताल इस वक्त म्यांमार में मौजूद है. यह टीम 60 बेड वाला फील्ड अस्पताल स्थापित करेगी. मंडाले में जल्द यह फील्ड अस्पताल ऑपरेशन थियेटर को स्तापित कर देगी. इस फैसेलिटी सबसे बड़ी खासियत है कि यह ट्रॉमा केसा के साथ साथ इमरजेंसी ऑपरेशन को भी बेहतर तरीके से अंजाम दे सकती है. रविवार को सेना ने अपने काम को अंजाम देना बी शुरू कर दिया. सबसे पहले एक टोही दल को मंडाले में हालातों का जायजा लेने के भेजा. यह मौजूदे सेना के बेस से 160 मील दूर है. इसे प्राथमिक ऑपरेशन बेस के तौर पर चिन्हित किया गया.

    भारतीय नौसेना ने भी ऑपरेशन के लिए अपने शिप को तैनात कर दिया.नौसेना के इस्टर्न नेवल कमांड से INS सतपुड़ा और INS सावित्र को राहत सामग्री के साथ 29 मार्च को रवाना किया गया.इसके अलावा अंदमान निकोबार कमांड ने INS कार्मुक और LCU 52 नेवल शिप को 30 मार्च को यंगून के लिए रवाना किया.तकरीबन 52 टन राहत सामग्री के साथ साथ पीने का पानी, कपड़े, दवाएं और इमरजेंसी सामान मौजूद है.वायुसेना के विमानों ने सबसे पहले म्यांमार की जमीन पर पहुंचा था. भूकंप के बाद रनवे की क्या हालत है इसकी ठीक जानकारी नहीं थी लेहाजा वायुसेना सबसे पहले C-130 J सुपहहर्क्यूलिस को रवाना किया. सुरक्षित तरीके से लैंड करने के बाद फिर एक के बाद एक एयरक्राफ्ट लान्च किए गए. तीन C-130 और दो C-17 ग्लोबमास्टर के जरिए कुल 96.3 टन जरूरी सप्लाई म्यांमार भेजी गई, आर्मी और NDRF के 198 जवानों को भी ऑपरेशन ब्रह्मा के लिए ग्राउंड जीरो तक पहुंचाया है.

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