
डेस्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा 2 अप्रैल को घोषित नई टैरिफ नीति ने वैश्विक व्यापार में तूफ़ान ला दिया है . हालांकि कई देश इससे प्रभावित होंगे, लेकिन भारतीय दृष्टिकोण से यह स्थिति एक सुनहरा अवसर प्रस्तुत करती है. अमेरिकी सरकार ने चीन, यूरोपीय संघ, जापान, वियतनाम जैसे देशों पर कड़े टैरिफ लगाए हैं, जिससे अमेरिकी बाजार में आयातित सामानों की कीमतें काफी बढ़ जाएंगी. इसके मुकाबले, भारतीय उत्पाद अपेक्षाकृत कम टैरिफ (26%) के कारण प्रतिस्पर्धात्मक बने रहेंगे.
भारतीय कंपनियों के लिए अवसर के प्रमुख पहलू
- अमेरिकी बाजार में भारत को मुख्य टक्कर चीन, वियतनाम जैसे देशों से मिल रही है . इन देशों पर अमेरिका ने ज़्यादा कड़े टैरिफ लगाये हैं. उदाहरण के तौर पर, यदि चीन से आयातित एक इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद का मूल मूल्य 200 डॉलर है, तो 32% टैरिफ लगने के बाद इसका मूल्य लगभग 264 डॉलर हो जाएगा. वहीं, अगर भारतीय उत्पाद पर 26% टैरिफ लगे, तो उसका मूल्य लगभग 252 डॉलर रहेगा. वियतनाम से वही सामान 47 % टैरिफ होने की वजह से 294 डॉलर का मिलेगा. इससे अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भारतीय उत्पाद अधिक किफायती विकल्प बनेंगे.
- भारतीय कंपनियां, खासकर फार्मास्यूटिकल्स, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, और सूचना प्रौद्योगिकी सेवाओं में, उच्च गुणवत्ता और नवीन तकनीक के बल पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपनी पहचान बना चुकी हैं.उदाहरण स्वरूप भारतीय जेनेरिक दवाओं के निर्माता अपने उत्पादों को विश्व स्तर पर किफायती और विश्वसनीय मानते हैं, जिससे अमेरिकी हेल्थकेयर सेक्टर में उनकी मांग बढ़ सकती है.
- भारत सरकार निर्यात को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न प्रोत्साहन योजनाओं, सब्सिडी और आसान ऋण सुविधाओं पर काम कर रही है. इससे भारतीय निर्यातकों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा में बने रहने में मदद मिलेगी और अमेरिकी बाजार में उनकी पहुंच मजबूत होगी.
- अमेरिकी टैरिफ नीति के कारण अन्य देशों में भी भारतीय कंपनियों के उत्पादों की मांग बढ़ सकती है.उदाहरण के तौर पर, भारतीय टेक्सटाइल और आभूषण उद्योग यूरोपीय और उभरते बाजारों में अपनी गुणवत्ता और किफायती मूल्य के कारण पहले से ही लोकप्रिय हैं; अब अमेरिका में भी इस स्थिति को लाभ में बदला जा सकता है.
- अमेरिकी बाजार में भारतीय कंपनियां अपनी स्थानीय उपस्थिति को बढ़ाने के लिए संयुक्त उद्यमों और सहयोगी योजनाओं का सहारा ले सकती हैं, जिससे उत्पादन लागत में कमी और त्वरित आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके.यह रणनीति अमेरिकी उपभोक्ताओं के लिए भारतीय माल की उपलब्धता और विश्वसनीयता दोनों बढ़ाएगी.