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पाकिस्तान समेत दुनिया के इन सात मंदिरों में महाशिवरात्रि पर जुटती है भारी भीड़

  • February 25, 2025

    नई दिल्ली: महाशिवरात्रि (Mahashivaratri 2025) केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पाकिस्तान (Pakistan) समेत दुनिया के कई देशों में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है. शिवभक्त इस विशेष दिन मंदिरों में बढ़ चढ़ कर पूजन करते हैं, यह दिन उनके लिए महत्वपूर्ण भी होता है. इस दिन वे दूर-दूर से मंदिरों में भगवान शिव (Lord Shiva) की आराधना के लिए जुटते हैं.

    पाकिस्तान, नेपाल और श्रीलंका (Pakistan, Nepal and Sri Lanka) में ऐसे कई ऐतिहासिक मंदिर हैं, जहां महाशिवरात्रि के अवसर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है. इनमें से कुछ मंदिर तो हजारों साल पुराने हैं और भारतीय संस्कृति से गहरे जुड़े हुए हैं. आइए जानते हैं उन सात मंदिरों के बारे में जहां महाशिवरात्रि के दिन भक्तों का जनसैलाब उमड़ पड़ता है.

    वरुण देव मंदिर: पाकिस्तान के कराची से कुछ दूरी पर स्थित मनौरा द्वीप पर भगवान शिव का एक ऐतिहासिक मंदिर है. इसे ‘मनौरा शिव मंदिर’ और वरुण देव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है. इस मंदिर का निर्माण प्राचीन काल में हुआ था और यह हिंदू श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल है.

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    माना जाता है कि यह मंदिर समुद्र के देवता वरुण और भगवान शिव की पूजा के लिए समर्पित है. महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष पूजा-अर्चना होती है, जिसमें पाकिस्तान के विभिन्न हिस्सों से हिंदू श्रद्धालु पहुंचते हैं. हालांकि, समय के साथ इस मंदिर की स्थिति काफी जर्जर हो गई है, लेकिन इसके धार्मिक महत्व में कोई कमी नहीं आई है.

    कटासराज मंदिर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित कटासराज मंदिर शिव भक्तों के लिए अत्यंत पवित्र स्थल है. मान्यता है कि जब माता सती का निधन हुआ था, तब भगवान शिव के आंसू जहां गिरे थे, वहां इस मंदिर का निर्माण हुआ. यह मंदिर एक विशाल परिसर में स्थित है, जिसमें कई छोटे-बड़े मंदिर शामिल हैं.

    महाशिवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में हिंदू श्रद्धालु जुटते हैं और शिवलिंग का जलाभिषेक करते हैं. पाकिस्तान सरकार भी इस मंदिर को धार्मिक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कोशिश कर रही है.

    गौरी मंदिर: सिंध प्रांत के थार इलाके में स्थित गौरी मंदिर भगवान शिव और देवी पार्वती को समर्पित है. इस मंदिर का निर्माण लगभग 300 साल पहले हुआ था. मंदिर की वास्तुकला राजस्थानी शैली की झलक देती है, जिससे यह और भी खास बन जाता है. महाशिवरात्रि के दौरान यहां विशेष रूप से पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन होता है. पाकिस्तान में रह रहे हिंदू श्रद्धालुओं के लिए यह मंदिर बहुत पवित्र स्थान माना जाता है.

    पशुपतिनाथ मंदिर: नेपाल की राजधानी काठमांडू में स्थित पशुपतिनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक माना जाता है. यह दक्षिण एशिया के सबसे पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है. हर साल महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां लाखों श्रद्धालु इकट्ठा होते हैं.

    नेपाल सरकार इस दिन विशेष व्यवस्थाएं करती है और मंदिर में भव्य आयोजन होते हैं. पशुपतिनाथ मंदिर को शिवभक्तों का स्वर्ग भी कहा जाता है. यहां केवल नेपाल ही नहीं, बल्कि भारत और अन्य देशों से भी भक्त दर्शन के लिए आते हैं.

    गोरखनाथ मंदिर: काठमांडू में ही स्थित गोरखनाथ मंदिर भी शिवभक्तों के लिए काफी अहम है. यह मंदिर भगवान शिव के अवतार गोरखनाथ को समर्पित है, जो नाथ संप्रदाय के प्रमुख संत थे. महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां विशेष पूजा और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है. इस मंदिर का ऐतिहासिक महत्व भी काफी ज्यादा है, क्योंकि नेपाल के राजाओं द्वारा भी इसकी पूजा की जाती थी.

    त्रिंकोमाली कोनेश्वरम मंदिर: श्रीलंका के त्रिंकोमाली में स्थित कोनेश्वरम मंदिर भगवान शिव के प्रमुख मंदिरों में से एक है. यह मंदिर हिंद महासागर के किनारे एक पहाड़ी पर स्थित है, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है. माना जाता है कि यह मंदिर हजारों साल पुराना है और रामायण काल से जुड़ा हुआ है. महाशिवरात्रि के दिन यहां हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं और भव्य उत्सव का आयोजन किया जाता है.

    भगवान शिव को समर्पित: श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में श्री कैलावासनाथन स्वामी देवस्थानम कोविल भगवान शिव को समर्पित एक भव्य मंदिर है. इस मंदिर महाशिवरात्रि के अवसर पर हिंदुओं का सैलाब उमड़ता है. यहां भव्य आयोजन होते हैं और विशेष रूप से पूरी रात जागरण भी किया जाता है. यह मंदिर तमिल हिंदू परंपरा के अनुसार चलाया जाता है और इसके दर्शन के लिए स्थानीय लोगों के अलावा विदेशी श्रद्धालु भी आते हैं.

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