नई दिल्ली । फ्रांस (France) की धुर दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन (Marine Le Pen) बड़ी मुसीबत में घिर गई हैं। फ्रांस की एक अदालत (Court) ने उन्हें गबन के मामले में दोषी करार दिया है। जानकारी के मुताबिक उन्हें चार साल की जेल 5 साल अयोग्यता की सजा दी गई है । ऐसे में वह 2027 का चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगी। मरीन ले पेन लंबे समय से फ्रांस की राष्ट्रपति पद की रेस में रहती हैं। वह दो बार इलेक्शन लड़ चुकी हैं, वहीं उन्होंने कहा था कि टॉप पोस्ट के लिए 2027 का चुनाव उनका आखिरी चुनाव होगा। मरीन ले पेन पर आरोप है कि उन्होंने यूरोपीय संघ के संसदीय सहायकों के लिए आवंटित राशि का इस्तेमाल उन्होंने पार्टी के लिए काम करने वाले कर्मचारियों को वेतन देने में कर लिया गया। यह 27 देशों के ग्रुप के नियमों का उल्लंघन है।
मरीन ले पेन के अलावा उनके 24 सहयोगियों को भी दोषी करार दिया है। वहीं उनके साथियों ने कहा है कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया। जानकारों का कहना है कि अदालत मरीन ले पेन को तत्काल पद के अयोग्य घोषित कर सकती है। प्रतिवादियों का कहना है कि मरीन ले पेन और उनके सहयोगियों को 10 साल की जेल भी हो सकती है। हालांकि उनके पास अन्य अदालत में अपील करने का अधिकार है।
2017 और 2022 के राष्ट्रपति चुनाव में इमैनुएल मैक्रों के बाद मरीन ले पेन दूसरे नंबर पर ही रहती थीं। हाल ही में हुए सर्वे में बताया गया था कि मरीन ले पेन का जन समर्थन तेजी से बढ़ा है। वहीं ले पेन को चिंता है कि अदालत के फैसले की वजह से वह चुनाव लड़ने से ही विंचत हो सकती है। मरीन ले पेन को सजा के दौरान दो साल इलेक्ट्रॉनिक मॉनिटरिंग में बिताने होंगे। सजा के ऐलान के दौरान मरीन ले पेन खुद अदालत में मौजूद थीं।
मरीन ले पेन नेशनल रैली पार्टी की नेता हैं। फैसला सुनने के बाद वह तुरंत अदालत से बाहर निकल गईँ। जज का पूरा फैसला भी उन्होंने नहीं सुना। रिपोर्ट्स में बताया गया कि जज ने जब फैसला पढ़ना शुरू किया और कहा कि यूरोपियन पार्लियामेंट के धन का दुरुपयोग किया गया है तो वह हैरान रह गईं। इसके थोड़ी ही देर बाद वह अदालत से बाहर निकल गईं। 2027 में एक बार फिर इमैनुएल मैक्रों राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार होंगे। उनकी प्रतिद्वंद्विता भी नहीं हो सकेगी और उनका रास्ता साफ हो जाएगा।
फैसले से दुखी मरीन ने कहा कि यह उनकी राजनीतिक हत्या की गई है। उन्होंने कहा कि नेशनल रैली पार्टी को सत्ता से दूर रखने की केवल यह साजिश है। वहीं ले पेन के समर्थकों का कहना है कि धन का उपयोग कानूनी तरीके से ही किया गया था। वहीं अदालत ने फैसले में कहा है कि जिन लोगों को भुगतान किया गया वे ले पेन की पार्टी के लिए काम कर रहे थे ना कि यूरोपीय संसद के लिए।
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