पुणे (Pune)। महाराष्ट्र (Maharashtra)में जैसे-जैसे विधानसभा चुनाव (assembly elections)करीब आ रहे हैं, विरोधी दलों में आपसी तकरार भी तेज (The conflict between them also intensified)हो रही है। वहीं शिवसेना (UBT) चीफ उद्धव ठाकरे (Chief Uddhav Thackeray)और उपमुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Deputy Chief Minister Devendra Fadnavis)के बीच जुबानी जंग भी तीखी होती जा रही है। दोनों ही एक दूसरे पर निजी टिप्पणी करने से भी चूक नहीं रहे हैं। शनिवार को मुंबई और पुणे की जनसभाओं में उद्धव ठाकरे ने फडणवीस को खटमल और तरबूज तक कह दिया। उन्होंने कहा कि अब उनसे छुटकारा पाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि सड़क के गड्ढों में उन्हें फेंक देना चाहिए।
वहीं नागपुर में फडणवीस ने कहा कि उद्धव ने अपना दिमागी संतुलन को दिया है। उन्होंने कहा, उद्धव जी फ्रस्ट्रेट हो गए हैं। जिस तरह के शब्दों का वह इस्तेमाल कर रहे हैं उससे उनके दिमागी हालत का अंदाजा लगता है। उनके शब्दों से औरंगजेब फैनक्लब के नेता के रूप में उनकी पहचान और मजबूत हो रही है। हाल ही में पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख और एनसीपी (शरदचंद्र पवार) चीफ शरद पवार ने आरोप लगाए थे कि उन्हें बीजेपी की तरफ से उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे को झूठे केसों में फंसाने का ऑफर दिया जा रहा है। इसके बाद उद्धव ठाकर ने यहां तक कह दिया कि या तो तुम (फडणवीस) राजनीति में रहोगे या फिर मैं रहूंगा।
रिपोर्ट के मुताबिक उद्धव ठाकरे के ही एक करीबी ने दावा किया है कि अगर उनके परिवार पर बात आती है तो वह अपने विरोधियों पर हमला करने में चूकते नहीं हैं। उनका मानना है बीजेपी उनकी राजनीति खत्म करना चाहती है। वहीं महाराष्ट्र में इस तरह की तीखी बयानबाजी कोई असामान्य नहीं है। एक समय था जब दोनों नेता एक दूसरे को समर्थन देकर सरकार बना रहे थे। 2014 से 2019 के बीच दोनों ही नेताओं में घनिष्ट संबंध थे। शिवसेना ने फडणवीस की सरकार में पूरा विश्वास जताया था।
फडणवीस भी उद्धव ठाकरे को मीठा बोलने वाले सहयोगियों में गिनते थे। वहीं 2017 में मुंबई सिविक पोल में 82 सीटें जीतने के बाद भी सिविक बॉडी पर उद्धव को पूरा नियंत्रण दे दिया। मेयर की पोस्ट भी शिवसेना को दे दी। 2022 में शिवसेना में फूट पड़ने और एकनाथ शिंदे के विद्रोह के बाद दोनों के बीच दूरी बढ़ गई। उद्धव की पार्टी का मानना है कि इस फूट के पीछे देवेंद्र फडणवीस का ही हाथ है। पिछले साल उद्धव ठाकरे ने जब फडणवीस को फाडतूस (फालतू) गृह मंत्री बताया था तो इसके जवाब में फडणवीस ने कहा था, मैं फाडतूस नहीं, कारतूस हूं। जिंदा कारतूस।
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