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हफ्ते में 90 घंटे काम की बहस: आनंद महिंद्रा बोले- पत्नी को देखना पसंद, काम की क्वालिटी जरूरी

January 12, 2025

नई दिल्ली। लार्सन एंड टुब्रो (Larsen and Toubro) के चेयरमैन एसएन सुब्रह्मण्यन (Chairman SN Subramanian) की हफ्ते में 90 घंटे काम (Work 90 hours a week) करने की सलाह पर बवाल मचा हुआ है। सोशल मीडिया से लेकर सेलिब्रिटीज तक, एसएन सुब्रह्मण्यन (SN Subramanian) पर निशाना साध रहे हैं। अब जाने-माने बिजनेसमैन और महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा (Mahindra Group Chairman, Anand Mahindra) ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा कि वह काम की क्वालिटी में विश्वास करते हैं, नाकि उसकी क्वांटिटी में। कार्यक्रम के दौरान, आनंद महिंद्रा ने एक सवाल के जवाब में कहा कि मैं सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसलिए नहीं हूं कि मैं अकेला हूं। मेरी पत्नी बहुत अच्छी है, मुझे उसे देखना पसंद है। मैं सोशल मीडिया पर इसलिए हूं, क्योंकि यह एक अद्भुत बिजनेस टूल है। मालूम हो कि सुब्रह्मण्यन ने ज्यादा से ज्यादा समय तक ऑफिस में काम करने की बात कहते हुए कहा था कि घर पर आप आखिर में कितनी देर पत्नी को निहार सकते हैं।


दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में आनंद महिंद्रा ने युवाओं से कहा, “मैं नारायण मूर्ति (इंफोसिस के संस्थापक) और अन्य लोगों का बहुत सम्मान करता हूं। इसलिए मुझे गलत नहीं समझना चाहिए। लेकिन मुझे कुछ कहना है, मुझे लगता है कि यह बहस गलत दिशा में जा रही है। मेरा कहना है कि हमें काम की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि काम की मात्रा पर। इसलिए यह 48, 40 घंटे, 70 घंटे या 90 घंटे के बारे में नहीं है।” उन्होंने कहा कि यह काम के आउटपुट पर निर्भर करता है। अगर 10 घंटे भी काम हो तो आप क्या आउटपुट दे रहे हैं? आप 10 घंटे में दुनिया बदल सकते हैं। आनंद महिंद्रा ने कहा कि उनका हमेशा से मानना ​​रहा है कि किसी की कंपनी में ऐसे लीडर और लोग होने चाहिए जो समझदारी से निर्णय और चुनाव करें।

इस बात पर विस्तार से बताते हुए कि किस तरह का दिमाग सही चुनाव और सही फैसले लेता है, आनंद महिंद्रा ने कहा कि यह एक ऐसा दिमाग है जो समग्र सोच से जुड़ा होता है और दुनिया भर से इनपुट के लिए खुला होता है। इसलिए मैं लिबरल आर्ट्स के पक्ष में हूं। मुझे लगता है कि भले ही आप इंजीनियर हों, भले ही आप एमबीए हों, आपको कला का अध्ययन करना चाहिए, आपको संस्कृति का अध्ययन करना चाहिए, क्योंकि मुझे लगता है कि जब आपके पास पूरा दिमाग होता है और आपको कला और संस्कृति के बारे में जानकारी होती है तो आप बेहतर निर्णय लेते हैं, तभी आप अच्छा निर्णय ले पाते हैं।

उन्होंने आगे कहा, “यदि आप ऐसा नहीं करते हैं, यदि आप घर पर समय नहीं बिता रहे हैं, यदि आप दोस्तों के साथ समय नहीं बिता रहे हैं, यदि आप पढ़ नहीं रहे हैं, यदि आप ऐसा नहीं कर रहे हैं, यदि आपके पास चिंतन करने का समय नहीं है, तो आप निर्णय लेने में सही इनपुट कैसे लाएंगे?” अपने ऑटो विनिर्माण व्यवसाय के बारे में एक उदाहरण देते हुए, आनंद महिंद्रा ने कहा कि एक परिवार के लिए कार बनाने के लिए परिवार की जरूरतों को समझना चाहिए। चलो अपना व्यवसाय लेते हैं, आप एक कार बनाते हैं। हमें यह तय करना होगा कि ग्राहक कार में क्या चाहता है। यदि हम हर समय केवल कार्यालय में रहते हैं, तो हम अपने परिवारों के साथ नहीं होते हैं, हम अन्य परिवारों के साथ नहीं होते हैं। हम कैसे समझेंगे कि लोग क्या खरीदना चाहते हैं? वे किस तरह की कार में बैठना चाहते हैं?”

‘पत्नी को कितनी देर तक निहार सकते हैं?’
बता दें कि लार्सन एंड टुब्रो (एलएंडटी) के चेयरमैन एस एन सुब्रमण्यन ने कहा है कि कर्मचारियों को सप्ताह में 90 घंटे काम करना चाहिए और रविवार को भी काम करने से नहीं हिचकना चाहिए। उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने तीखी टिप्पणियां की हैं। सुब्रमण्यन को कथित वीडियो में अपने कर्मचारियों को यह कहते सुना जा सकता है, ”आखिर आप अपनी पत्नी को कितनी देर तक निहार सकते हैं।” वीडियो में उन्होंने कर्मचारियों से घर पर कम और कार्यालय में अधिक समय बिताने को कहा। उनकी बातों से कार्य-जीवन संतुलन की बहस फिर से छिड़ गयी है। सबसे पहले इन्फोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति के 70 घंटे के कार्य सप्ताह के सुझाव से यह बहस शुरू हुई थी। सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वीडियो में सुब्रमण्यन को यह कहते हुए सुना जा सकता है, ”मुझे अफसोस है कि मैं आपसे रविवार को काम नहीं करवा पा रहा हूं। अगर मैं आपसे रविवार को काम करवा सकूं, तो मुझे और खुशी होगी, क्योंकि मैं रविवार को काम करता हूं।”

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