नई दिल्ली । तमिलनाडु (Tamil Nadu) के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन (Chief Minister MK Stalin) केंद्र सरकार (Central government) के खिलाफ दक्षिण भारतीय राज्यों को लामबंद करते नजर आ रहे हैं। उन्होंने रविवार को कहा कि इससे पहले दक्षिण एकता की जरूरत पहले कभी नहीं थी। साथ ही उन्होंने ATM से रुपये निकालने को लेकर RBI यानी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के फैसले पर भी आपत्ति जाहिर की है।
द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम के अध्यक्ष स्टालिन ने तेलुगु और कन्नड़ भाषी लोगों को उगादि की शुभकामनाएं देते हुए उन्होंने एकता की आवश्यकता पर बल दिया। साथ ही कहा कि हमारे अधिकारों एवं पहचान को कमजोर करने के सभी प्रयास को विफल करने के लिए सभी को एकजुट होना चाहिए।
उन्होंने लिखा, ‘मैं अपने सभी तेलुगु और कन्नड़ भाषी द्रविड़ बहनों और भाइयों को खुशहाल उगादि की शुभकामनाएं देता हूं, क्योंकि आप आशा एवं उत्सव के साथ नए साल का स्वागत कर रहे हैं।’
स्टालिन ने कहा, ‘हिंदी थोपे जाने और परिसीमन जैसी बढ़ती भाषाई और राजनीतिक खतरों के मद्देनजर, दक्षिणी एकता की आवश्यकता पहले कभी इतनी ज्यादा नहीं थी। हमें एकजुट होकर अपने अधिकारों एवं पहचान को कमजोर करने के सभी प्रयासों को विफल करना होगा।’ उन्होंने कहा कि ‘यह उगादि प्रतिरोध एवं एकजुटता की भावना को प्रज्वलित करे जो हमें एकजुट रखे।’
RBI पर भड़के
स्टालिन ने आरबीआई के उस निर्णय का मजबूत विरोध किया, जिसमें बैंकों को मासिक सीमा से अधिक एटीएम निकासी के लिए 23 रुपये तक चार्ज करने की अनुमति दी गई है। उन्होंने कहा, ‘केंद्र सरकार ने सभी से बैंक खाते खोलने का आग्रह किया। फिर नोटबंदी हुई और डिजिटल इंडिया की बात की गई।’
स्टालिन ने कहा, ‘इसके बाद क्या हुआ? डिजिटल लेनदेन पर शुल्क, कम शेष राशि के लिए जुर्माना और अब आरबीआई ने बैंकों को मासिक सीमा से अधिक एटीएम निकासी के लिए 23 रुपये तक का शुल्क लेने की अनुमति दी है।’ उन्होंने कहा, ‘इससे लोग अपनी जरूरत से ज्यादा धन निकालेंगे और विशेष रूप से गरीबों के वित्तीय समावेशन के उद्देश्य नकार दिए जाएंगे।’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम के लाभार्थी, जो पहले से ही धन की कमी से जूझ रहे हैं, तथा वे गरीब लोग जो हमारे कलैगनार मगालीर उरीमाई थिट्टम नकद हस्तांतरण से लाभान्वित होते हैं, वे सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।’ उन्होंने कहा, ‘यह डिजिटलीकरण नहीं है। यह संस्थागत वसूली है। गरीब लूटते हैं, अमीर मुस्कुराते हैं।’
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