नई दिल्ली (New Delhi) । दिल्ली सेवा बिल (Delhi Service Bill) लोकसभा के बाद सोमवार को राज्यसभा (Rajya Sabha) में भी पास हो गया। 7 घंटे से भी ज्यादा समय तक चली चर्चा के बाद वोटिंग के आधार पर मुकाबला 131-102 का रहा। इसके साथ ही संसद (Parliament) में पहली परीक्षा का सामना कर रहे INDIA गठबंधन को पहले मुकाबले में हार मिली। वहीं, राज्यसभा में सियासी साथियों का समर्थन पाकर सरकार ने बिल पास करा लिया।
आंकड़ों ने किया हैरान
उम्मीद की जा रही थी कि बिल का विरोध कर रहे विपक्ष को 108 वोट तक मिल सकते हैं, लेकिन उन्हें 102 सदस्यों का ही समर्थन मिल सका। इधर, संभावनाएं जताई जा रही थीं कि सरकार के समर्थन में 128 या 129 सांसद मतदान कर सकते हैं, लेकिन अंतिम नतीजा 131 पर पहुंच गया। फिलहाल, राज्यसभा में सदस्यों की संख्या 238 है और 7 पद रिक्त हैं।
विपक्ष के समर्थन में कौन
नए विपक्षी गठबंधन INDIA ने दिल्ली बिल के खिलाफ राज्यसभा में मतदान किया। राज्यसभा में बिल पेश होने से पहले ही कहा जा रहा था कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल आम आदमी पार्टी सांसदों के अलावा 70 से ज्यादा सदस्यों का समर्थन हासिल कर चुके थे। तब तक इसमें कांग्रेस के आंकड़े शामिल नहीं थे, लेकिन सोमवार के मतदान में कांग्रेस दिल्ली बिल के विरोध में नजर आई।
आंकड़ों में समझें
कांग्रेस (31), ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (13), आम आदमी पार्टी (10), द्रविड़ मुन्नेत्र कझगम (10), भारत राष्ट्र समिति (7), राष्ट्रीय जनता दल (6), सीपीएम (5), राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (4), समाजवादी पार्टी (3), शिवसेना UBT (3), सीपीआई (2), झारखंड मुक्ति मोर्चा (2), इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (1), राष्ट्रीय लोक दल (1), जनता दल यूनाइटेड (5) दिल्ली बिल के विरोध में नजर आए।
इसके अलावा हनुमान बेनीवाल की राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी बिल का विरोध किया। खास बात है कि इस दौरान बहुजन समाज पार्टी, जनता दल सेक्युलर मतदान से दूर रहे। जबकि, पहले NDA का सदस्य रहे शिरोमणि अकाली दल ने बिल को लेकर दोनों ही पक्षों पर निशाना साधा।
बिल में क्या
यह विधेयक दिल्ली में समूह-ए के अधिकारियों के स्थानांतरण एवं पदस्थापना के लिए एक प्राधिकार के गठन के लिहाज से लागू अध्यादेश का स्थान लेगा। दरअसल, इसके जरिए केंद्र सरकार को दिल्ली में अधिकारियों को तबादले, नियुक्ति और निगरानी समेत कई अधिकार मिल जाएंगे। दिल्ली और केंद्र सरकार के बीच लंबे समय से इस मुद्दे पर तकरार जारी थी।
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